मेरा वो जहान

कल्पना करती हूं जहान में एक जहान हो, जहा सुबह की भीनी भीनी खुशबू के साथ सूरज की पहली किरण मेरी बंद आंखो को ऐसे जगाए जैसे सूखे हुए पत्तो पे बारिश की एक बूंद गिरती हो….।इन्द्रधनुशी अंबर में सतरंगी रंगो के नज़ारे देख कर मन एक आज़ाद पंछी की तरह उडे और उस मोरContinue reading “मेरा वो जहान”

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