
It was just the beginning of my feelings, I had not even been able to give words to my feelings.
Do not know in which pages you have lost as the words of the poem in my diary.
I am unable to write even after writing you, I do not know how confused I am. Can’t even understand by understanding myself.
My diary also questions me – “Who stole your words who used to express her thoughts without thinking, who silenced her”?
~Nidhi~
(मेरी खाली डायरी
अभी तो शुरुवात ही थी मेरे जज्बातों की, अभी तो अपने एहसासों को शब्द दे भी नहीं पाई थी।
ना जाने किन पन्नों में कहां खो गए तुम, मेरी डायरी की कविता के शब्द बन कर।
लिख कर भी नहीं लिख पा रही तुझे, ना जाने किस उलझन में हूं। खुद को समझ कर भी नहीं समझ पा रही।
मेरी डायरी भी मुझ से सवाल करती है- “तेरे शब्दों को कौन चुरा ले गया जो बिना सोचे अपने एहसासों को बया कर देती थी, उसे कौन मौन कर गया”?)
~निधि~
आपकी डायरी में बहुत शब्द होने अवश्य
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जरूर होंगे शब्द, मेरी डायरी भी इनके बिना अधूरी है।
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मैं उन शब्दों के उद्धरण की प्रतीक्षा में हूँ। 🙏
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मैंने आपकी पेंटिंग देखी अद्भुत, अतुलनीय है। 🌺🌺
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जी तहे दिल से शुक्रिया आपका।💐💐🙂
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काश मैं इंस्टाग्राम पर होता। तो आपकी चित्रकला का आनंद लेता।
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जी जरूर, आप यहां भी देख पायेंगे । 🙂
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आभार बंधु🙏
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तेरे वगैर सुबहां नही होती थी,
तुम इतने खास थे,
अब रात हो जाती मगर तुम नही दिखते,
कलतलक शब्द बन लबों पर छाए रहते,
आज डायरी के शब्दों में भी
ढूंढने पर नही मिलते।
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बहुत ही ख़ूबसूरत पंक्तियां ।👌 शुक्रिया आपका 💐💐💐💐
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स्वागत आपका।
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दिल की गहराइयों से लिखते हो
बहुत बढ़िया लिखते हो ।
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बहुत-बहुत धन्यवाद आपका 💐
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एक “क़लम” से शुरुआत की थी ,
ज़िन्दगी में लेखक बनने की
“ख़्वाहिश”
दिल में उमड़ गयी
काटों भरे इन जीवन में …
“शब्द “तो मिलने से
रहे , हाँ पर जीवन में “तजुर्बे “मिलते
गए …..
ओर एक “कहानी “बन गयी।
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